श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुन और बभ्रुवाहनका युद्ध एवं अर्जुनकी मृत्यु  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  14.79.31 
सम्प्रीयमाण: पार्थानामृषभ: पुत्रविक्रमात्।
नात्यर्थं पीडयामास पुत्रं वज्रधरात्मज:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
कुंती के पुत्रों में श्रेष्ठ इन्द्रपुत्र अर्जुन अपने पुत्र के पराक्रम से बहुत प्रसन्न थे, इसलिए उन्होंने उसे अधिक कष्ट नहीं दिया।
 
Arjuna, the son of Indra, the best of the sons of Kunti, was very pleased with his son's prowess. That is why he did not trouble him much. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)