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श्लोक 14.78.49  |
क्रमेण स हयस्त्वेवं विचरन् पुरुषर्षभ।
मणिपूरपतेर्देशमुपायात् सहपाण्डव:॥ ४९॥ |
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| अनुवाद |
| हे महापुरुष जनमेजय! इस प्रकार अर्जुन के साथ घोड़ा चलता हुआ मणिपुर के राजा के राज्य में पहुँचा। |
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| O great man, Janamejaya! Thus traveling along with Arjun the horse reached the kingdom of the King of Manipur. |
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इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि सैन्धवपराजये अष्टसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें सैन्धवोंकी पराजयविषयक अठहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७८॥
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