श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 78: अर्जुनका सैन्धवोंके साथ युद्ध और दु:शलाके अनुरोधसे उसकी समाप्ति  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  14.78.40-41h 
तमनार्यं नृशंसं च विस्मृत्यास्य पितामहम्॥ ४०॥
आगस्कारिणमत्यर्थं प्रसादं कर्तुमर्हसि।
 
 
अनुवाद
इस बालक का दादा (जयद्रथ) तुम्हारे प्रति असभ्य, क्रूर और अपराधी था। उसे भूल जाओ और इस बालक पर दया करो।॥40 1/2॥
 
This child's grandfather (Jaidrath) was uncivilized, cruel and a criminal towards you. Forget him and have mercy on this child.'॥ 40 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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