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श्लोक 14.78.40-41h  |
तमनार्यं नृशंसं च विस्मृत्यास्य पितामहम्॥ ४०॥
आगस्कारिणमत्यर्थं प्रसादं कर्तुमर्हसि। |
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| अनुवाद |
| इस बालक का दादा (जयद्रथ) तुम्हारे प्रति असभ्य, क्रूर और अपराधी था। उसे भूल जाओ और इस बालक पर दया करो।॥40 1/2॥ |
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| This child's grandfather (Jaidrath) was uncivilized, cruel and a criminal towards you. Forget him and have mercy on this child.'॥ 40 1/2॥ |
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