श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 78: अर्जुनका सैन्धवोंके साथ युद्ध और दु:शलाके अनुरोधसे उसकी समाप्ति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  14.78.4 
कुरुध्वं सर्वकार्याणि महद् वो भयमागतम्।
एष योत्स्यामि सर्वांस्तु निवार्य शरवागुराम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘तुम अपने सब कार्य पूर्ण करो। तुम पर महान भय छा गया है। देखो, मैं तुम्हारे बाणों के जाल को नष्ट करने तथा तुम सबके साथ युद्ध करने के लिए तैयार हूँ। ॥4॥
 
‘You complete all your tasks. A great fear has come upon you. Look here—I am ready to destroy your net of arrows and fight with all of you. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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