| श्री महाभारत » पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व » अध्याय 78: अर्जुनका सैन्धवोंके साथ युद्ध और दु:शलाके अनुरोधसे उसकी समाप्ति » श्लोक 3 |
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| | | | श्लोक 14.78.3  | तान् प्रहस्य महाबाहु: पुनरेव व्यवस्थितान्।
तत: प्रोवाच कौन्तेयो मुमूर्षून् श्लक्ष्णया गिरा।
युध्यध्वं परया शक्त्या यतध्वं विजये मम॥ ३॥ | | | | | | अनुवाद | | उस समय पराक्रमी कुन्तीपुत्र अर्जुन पुनः मरणासन्न होकर खड़े हो गये और सिन्धुओं को सम्बोधित करके मधुर वाणी में मुस्कराते हुए बोले, 'वीरों! अपनी पूरी शक्ति से युद्ध करो और मुझे जीतने का प्रयत्न करते रहो।' | | | | At that time, the powerful son of Kunti, Arjuna, once again stood with the desire to die and addressed the Sindhus and smilingly said in a sweet voice, 'Heroes! Fight with all your might and keep trying to conquer me. | | ✨ ai-generated | | |
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