Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.75.16-17: तब अर्जुन ने कुपित होकर तुरन्त ही वज्रदत्त पर सुवर्णमय पंखयुक्त सीधे बाण छोड़े। उन बाणों से आहत होकर महाबली वज्रदत्त उस महायुद्ध में हाथी की पीठ से गिर पड़ा; परन्तु फिर भी उसकी चेतना नष्ट नहीं हुई॥16-17॥ | mahabharat अध्याय 14.75: अर्जुनका प्राग्ज्योतिषपुरके राजा वज्रदत्तके साथ युद्ध । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततोऽर्जुनस्तूर्णतरं रुक्मपुङ्खानजिह्मगान्।
प्रेषयामास संक्रुद्धो भगदत्तात्मजं प्रति॥ १६॥
स तैर्विद्धो महातेजा वज्रदत्तो महामृधे।
भृशाहत: पपातोर्व्यां न त्वेनमजहात् स्मृति:॥ १७॥
अनुवाद
तब अर्जुन ने कुपित होकर तुरन्त ही वज्रदत्त पर सुवर्णमय पंखयुक्त सीधे बाण छोड़े। उन बाणों से आहत होकर महाबली वज्रदत्त उस महायुद्ध में हाथी की पीठ से गिर पड़ा; परन्तु फिर भी उसकी चेतना नष्ट नहीं हुई॥16-17॥
Then Arjuna, enraged, immediately shot straight arrows fitted with golden feathers at Vajradatta. Hurt and wounded by those arrows, the mighty Vajradatta fell from the elephant's back to the ground in that great war; but even then he did not lose consciousness.॥16-17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥