श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 72: व्यासजीकी आज्ञासे अश्वकी रक्षाके लिये अर्जुनकी, राज्य और नगरकी रक्षाके लिये भीमसेन और नकुलकी तथा कुटुम्ब-पालनके लिये सहदेवकी नियुक्ति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  14.72.6 
तमुत्सृज यथाशास्त्रं पृथिवीं सागराम्बराम्।
स पर्येतु यशो दीप्तं तव पार्थिव दर्शयन्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! जो भी घोड़ा चुना जाए, उसे शास्त्रीय विधि के अनुसार छोड़ दो और वह आपकी उज्ज्वल कीर्ति फैलाता हुआ सम्पूर्ण पृथ्वी पर समुद्र पर्यन्त भ्रमण करे॥6॥
 
Prithvinath! Whichever horse is chosen, release it according to the classical method and it should travel across the entire earth till the sea, spreading your shining fame. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)