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mahabharat 14.72.5: अश्वविद्या में पारंगत सूत और ब्राह्मणों को यज्ञार्थ की सिद्धि के लिए पवित्र अश्व की परीक्षा करनी चाहिए। 5॥   |   mahabharat अध्याय 14.72: व्यासजीकी आज्ञासे अश्वकी रक्षाके लिये अर्जुनकी, राज्य और नगरकी रक्षाके लिये भीमसेन और नकुलकी तथा कुटुम्ब-पालनके लिये सहदेवकी नियुक्ति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 72: व्यासजीकी आज्ञासे अश्वकी रक्षाके लिये अर्जुनकी, राज्य और नगरकी रक्षाके लिये भीमसेन और नकुलकी तथा कुटुम्ब-पालनके लिये सहदेवकी नियुक्ति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  14.72.5 
अश्वविद्याविदश्चैव सूता विप्राश्च तद्विद:।
मेध्यमश्वं परीक्षन्तां तव यज्ञार्थसिद्धये॥ ५॥
 
 
अनुवाद
अश्वविद्या में पारंगत सूत और ब्राह्मणों को यज्ञार्थ की सिद्धि के लिए पवित्र अश्व की परीक्षा करनी चाहिए। 5॥
 
Soot and Brahmins knowledgeable in horse knowledge should test the sacred horse for the accomplishment of the Yagyaarth. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)