श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 72: व्यासजीकी आज्ञासे अश्वकी रक्षाके लिये अर्जुनकी, राज्य और नगरकी रक्षाके लिये भीमसेन और नकुलकी तथा कुटुम्ब-पालनके लिये सहदेवकी नियुक्ति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  14.72.4 
चैत्र्यां हि पौर्णमास्यां तु तव दीक्षा भविष्यति।
सम्भारा: सम्भ्रियन्तां च यज्ञार्थं पुरुषर्षभ॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे महात्मन! आगामी चैत्र पूर्णिमा को आपको यज्ञ की दीक्षा दी जाएगी; तब तक आप उसके लिए सामग्री एकत्रित कर लीजिए ॥4॥
 
O great man! On the coming Chaitra Poornima you will be initiated into the Yagya; until then you should collect the materials for it. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)