व्यास उवाच
अहं पैलोऽथ कौन्तेय याज्ञवल्क्यस्तथैव च।
विधानं यद् यथाकालं तत् कर्तारो न संशय:॥ ३॥
अनुवाद
व्यासजी बोले - कुन्तीनन्दन! जब यज्ञ का समय आएगा, तब मैं, पैल और याज्ञवल्क्य आकर तुम्हारे यज्ञ का सम्पूर्ण अनुष्ठान सम्पन्न कराएँगे; इसमें संशय नहीं है॥3॥
Vyasji said – Kuntinandan! When the time of Yagya comes, I, Pail and Yajnavalkya will come and complete all the rituals of your Yagya; There is no doubt in it. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥