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mahabharat 14.72.16: ‘उसके पास दिव्य अस्त्र, दिव्य कवच, दिव्य धनुष और दिव्य तरकश हैं; इसलिए वह अकेला ही इस घोड़े के पीछे चलेगा ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 14.72: व्यासजीकी आज्ञासे अश्वकी रक्षाके लिये अर्जुनकी, राज्य और नगरकी रक्षाके लिये भीमसेन और नकुलकी तथा कुटुम्ब-पालनके लिये सहदेवकी नियुक्ति   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 72: व्यासजीकी आज्ञासे अश्वकी रक्षाके लिये अर्जुनकी, राज्य और नगरकी रक्षाके लिये भीमसेन और नकुलकी तथा कुटुम्ब-पालनके लिये सहदेवकी नियुक्ति  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  14.72.16 
तस्मिन् ह्यस्त्राणि दिव्यानि दिव्यं संहननं तथा।
दिव्यं धनुश्चेषुधी च स एनमनुयास्यति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘उसके पास दिव्य अस्त्र, दिव्य कवच, दिव्य धनुष और दिव्य तरकश हैं; इसलिए वह अकेला ही इस घोड़े के पीछे चलेगा ॥16॥
 
‘He has divine weapons, divine armour, divine bow and divine quiver; therefore he alone will follow this horse.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)