Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.72.14-15: वैशम्पायन कहते हैं - राजन! युधिष्ठिर के ऐसा पूछने पर श्रीकृष्ण द्वैपायन व्यास ने कहा - राजन! अर्जुन समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ है। वह विजय के लिए उत्सुक, सहनशील और धैर्यवान है; इसलिए वह इस अश्व की रक्षा करेगा। उसने निवातकवचियों का नाश किया था। उसमें सम्पूर्ण विश्व को जीतने की शक्ति है। 14-15. | mahabharat अध्याय 14.72: व्यासजीकी आज्ञासे अश्वकी रक्षाके लिये अर्जुनकी, राज्य और नगरकी रक्षाके लिये भीमसेन और नकुलकी तथा कुटुम्ब-पालनके लिये सहदेवकी नियुक्ति । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
इत्युक्त: स तु राजेन्द्र कृष्णद्वैपायनोऽब्रवीत्।
भीमसेनादवरज: श्रेष्ठ: सर्वधनुष्मताम्॥ १४॥
जिष्णु: सहिष्णुर्धृष्णुश्च स एनं पालयिष्यति।
शक्त: स हि महीं जेतुं निवातकवचान्तक:॥ १५॥
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - राजन! युधिष्ठिर के ऐसा पूछने पर श्रीकृष्ण द्वैपायन व्यास ने कहा - राजन! अर्जुन समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ है। वह विजय के लिए उत्सुक, सहनशील और धैर्यवान है; इसलिए वह इस अश्व की रक्षा करेगा। उसने निवातकवचियों का नाश किया था। उसमें सम्पूर्ण विश्व को जीतने की शक्ति है। 14-15.
Vaishampayana says - King! When Yudhishthira asked this, Shri Krishna Dwaipayana Vyas said - King! Arjun is the best among all archers. He is enthusiastic about victory, tolerant and patient; hence he will protect this horse. He had destroyed the Nivaatakavachos. He has the power to conquer the entire world. 14-15.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥