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mahabharat 14.69.10: पिताजी! ऐसा लगता है कि मनुष्य का मरना बहुत कठिन है, क्योंकि पति और पुत्र से रहित होने पर भी मेरा हृदय हजार टुकड़ों में नहीं टूट रहा है।   |   mahabharat अध्याय 14.69: उत्तराका विलाप और भगवान‍् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 69: उत्तराका विलाप और भगवान‍् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  14.69.10 
अथवा दुर्मरं तात यदिदं मे सहस्रधा।
पतिपुत्रविहीनाया हृदयं न विदीर्यते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
पिताजी! ऐसा लगता है कि मनुष्य का मरना बहुत कठिन है, क्योंकि पति और पुत्र से रहित होने पर भी मेरा हृदय हजार टुकड़ों में नहीं टूट रहा है।
 
Father! It seems that it is very difficult for a human being to die, because even after being devoid of my husband and son, my heart is not breaking into thousands of pieces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)