यदि स्म धर्मराज्ञा वा भीमसेनेन वा पुन:।
त्वया वा पुण्डरीकाक्ष वाक्यमुक्तमिदं भवेत्॥ १४॥
अजानतीमिषीकेयं जनित्रीं हन्त्विति प्रभो।
अहमेव विनष्टा स्यां नैतदेवंगते भवेत्॥ १५॥
अनुवाद
प्रभु! पुण्डरीकाक्ष! यदि धर्मराज या आर्य भीमसेन या आपने कहा होता कि यह काँटा बालक को न मारकर उसकी अज्ञात माता को मार डाले, तो ही मेरा नाश होता। उस स्थिति में यह विपत्ति न होती॥14-15॥
‘Prabhu! Pundarikaksha! If Dharmaraj or Arya Bhimsen or you had said that this thorn should kill the child's unknown mother instead of killing him, then only I would have been destroyed. In that case this tragedy would not have happened.॥ 14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥