श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 67: परीक्षित् को जिलानेके लिये सुभद्राकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  14.67.9 
साहं प्रसादये कृष्ण त्वामद्य शिरसा नता।
पृथेयं द्रौपदी चैव ता: पश्य पुरुषोत्तम॥ ९॥
 
 
अनुवाद
पुरुषोत्तम! श्रीकृष्ण! आज मैं आपके चरणों पर अपना सिर रखकर आपको प्रसन्न करना चाहती हूँ। बुआ कुंती और बहन द्रौपदी भी आपके चरणों पर लेटी हुई हैं। उन सबको देखिए।॥9॥
 
‘Purushottam! Shri Krishna! Today I want to please you by placing my head on your feet. Aunt Kunti and sister Draupadi are also lying on your feet. Look at all of them.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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