श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 67: परीक्षित् को जिलानेके लिये सुभद्राकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  14.67.8 
भवितात: परं दु:खं किं तदन्यज्जनार्दन।
अभिमन्यो: सुतात् कृष्ण मृताज्जातादरिंदम॥ ८॥
 
 
अनुवाद
शत्रुसूदन! जनार्दन! श्रीकृष्ण! अभिमन्यु जैसे वीर का पुत्र मृत पैदा हो, इससे अधिक दुःख की बात और क्या हो सकती है?॥8॥
 
Shatrusudan! Janardan! Shri Krishna! What can be more saddening than the son of a brave man like Abhimanyu being born dead?॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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