श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 67: परीक्षित् को जिलानेके लिये सुभद्राकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  14.67.7 
अभिमन्यु: प्रिय: कृष्ण भ्रातृॄॄणां नात्र संशय:।
ते श्रुत्वा किं नु वक्ष्यन्ति द्रोणपुत्रास्त्रनिर्जिता:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण! इसमें संदेह नहीं कि अभिमन्यु पाँचों भाइयों का अत्यन्त प्रिय था। अश्वत्थामा के अस्त्र से पराजित पाण्डव उसके पुत्र की दुर्दशा सुनकर क्या कहेंगे? 7॥
 
Sri Krishna! There is no doubt that Abhimanyu was very dear to the five brothers. What would the Pandavas, who were defeated by Ashwatthama's weapon, say after hearing about the plight of his son? 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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