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श्लोक 14.67.19  |
स्वसेति वा महाबाहो हतपुत्रेति वा पुन:।
प्रपन्ना मामियं चेति दयां कर्तुमिहार्हसि॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| महाबाहो! आप मुझ पर दया करें, यह समझकर कि वह मेरी बहन है अथवा जिसका पुत्र मारा गया है, वह कोई दरिद्र है अथवा शरण लेने आई हुई कोई असहाय दयनीय स्त्री है।॥19॥ |
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| Mahabaho! You should show mercy on me, considering that she is my sister or the person whose son has been killed is a poor person or a helpless pitiable woman who has come seeking refuge.'॥ 19॥ |
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इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि सुभद्रावाक्ये सप्तषष्टितमोऽध्याय:॥ ६७॥
इसप्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें सुभद्राका वचनविषयक सरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६७॥
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