श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 67: परीक्षित् को जिलानेके लिये सुभद्राकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  14.67.13 
यद्येतत् त्वं प्रतिश्रुत्य न करोषि वच: शुभम्।
सकलं वृष्णिशार्दूल मृतां मामवधारय॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे वृष्णिवंशी सिंह! यदि तू ऐसी प्रतिज्ञा कर और अपना शुभ वचन पूरा न कर, तो समझ ले कि सुभद्रा जीवित नहीं रहेगी - मैं अपने प्राण त्याग दूँगा॥13॥
 
O Lion of the Vrishni clan! If you make such a vow and do not fulfill your auspicious word, then understand that Subhadra will not survive - I will sacrifice my life.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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