श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 67: परीक्षित् को जिलानेके लिये सुभद्राकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  14.67.12 
इत्येतद् वचनं श्रुत्वा जानानाहं बलं तव।
प्रसादये त्वां दुर्धर्ष जीवतामभिमन्युज:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
भ्राता! आप एक प्रचण्ड योद्धा हैं। आपकी बातें सुनकर मैं आपके बल को भली-भाँति जानता हूँ। इसीलिए मैं आपको प्रसन्न करना चाहता हूँ। आपके आशीर्वाद से यह अभिमन्यु पुत्र जीवित हो जाए॥ 12॥
 
Brother! You are a fierce warrior. After hearing what you said, I know your strength very well. That is why I want to please you. May this son of Abhimanyu become alive due to your blessings.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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