| श्री महाभारत » पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व » अध्याय 67: परीक्षित् को जिलानेके लिये सुभद्राकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना » श्लोक 1 |
|
| | | | श्लोक 14.67.1  | वैशम्पायन उवाच
उत्थितायां पृथायां तु सुभद्रा भ्रातरं तदा।
दृष्ट्वा चुक्रोश दु:खार्ता वचनं चेदमब्रवीत्॥ १॥ | | | | | | अनुवाद | | वैशम्पायनजी कहते हैं - हे जनमेजय! जब कुन्तीदेवी बैठ गईं, तब सुभद्रा अपने भाई श्रीकृष्ण की ओर देखकर अत्यन्त विलाप करने लगीं। वे दुःख से व्याकुल होकर इस प्रकार बोलीं -॥1॥ | | | | Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! After Kunti Devi sat down, Subhadra looked at her brother Sri Krishna and started crying profusely. Distressed with grief, she spoke thus:॥ 1॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|