श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 66: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें आगमन और उत्तराके मृत बालककोजिलानेके लियेकुन्तीकी उनसे प्रार्थना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  14.66.28 
अब्रुवंश्च महाराज सर्वा: सास्राविलेक्षणा:।
स्वस्रीयो वासुदेवस्य मृतो जात इति प्रभो॥ २८॥
 
 
अनुवाद
समर्थ महाराज! उन सबके नेत्रों से आँसू बह रहे थे और वे सब रोते हुए कह रहे थे, 'हाय! श्रीकृष्ण के भांजे का बालक मरा हुआ पैदा हुआ।'॥28॥
 
Samarth Maharaj! Tears were flowing from the eyes of all of them and they were all crying and saying, 'Alas! The child of Shri Krishna's nephew was born dead.'॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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