श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 66: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें आगमन और उत्तराके मृत बालककोजिलानेके लियेकुन्तीकी उनसे प्रार्थना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  14.66.27 
एवमुक्त्वा तु वार्ष्णेयं पृथा पृथुललोचना।
उच्छ्रित्य बाहू दु:खार्ता ताश्चान्या: प्रापतन् भुवि॥ २७॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण से ऐसा कहकर विशाल नेत्रों वाली कुन्ती दोनों भुजाएँ उठाकर शोक से भूमि पर गिर पड़ीं। अन्य स्त्रियों के साथ भी ऐसा ही हुआ॥ 27॥
 
Having said this to Shri Krishna, Kunti with huge eyes raised both her arms and fell on the ground in grief. The same happened to the other women too.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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