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mahabharat 14.66.23-24: दाशारः! अभिमन्यु ने एक बार उत्तरा से स्नेहपूर्वक कहा था - "कल्याणि! तुम्हारा पुत्र मेरे मामा के यहाँ जाकर वृष्णि और अन्धकों के कुल में जाकर धनुर्वेद, नाना प्रकार के विचित्र अस्त्र-शस्त्र और शुद्ध नीति की शिक्षा लेगा।" 23-24॥   |   mahabharat अध्याय 14.66: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें आगमन और उत्तराके मृत बालककोजिलानेके लियेकुन्तीकी उनसे प्रार्थना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.66.23-24 
अब्रवीत् किल दाशार्ह वैराटीमार्जुनिस्तदा।
मातुलस्य कुलं भद्रे तव पुत्रो गमिष्यति॥ २३॥
गत्वा वृष्ण्यन्धककुलं धनुर्वेदं ग्रहीष्यति।
अस्त्राणि च विचित्राणि नीतिशास्त्रं च केवलम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
दाशारः! अभिमन्यु ने एक बार उत्तरा से स्नेहपूर्वक कहा था - "कल्याणि! तुम्हारा पुत्र मेरे मामा के यहाँ जाकर वृष्णि और अन्धकों के कुल में जाकर धनुर्वेद, नाना प्रकार के विचित्र अस्त्र-शस्त्र और शुद्ध नीति की शिक्षा लेगा।" 23-24॥
 
‘Dashaarh! Abhimanyu had once said affectionately to Uttara - "Kalyani! Your son will go to my maternal uncle's place and will go to the clan of Vrishni and Andhakas and learn Dhanurveda, various types of strange weapons and pure ethics." 23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)