श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 66: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें आगमन और उत्तराके मृत बालककोजिलानेके लियेकुन्तीकी उनसे प्रार्थना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  14.66.22 
उत्तरा हि पुरोक्तं वै कथयत्यरिसूदन।
अभिमन्योर्वच: कृष्ण प्रियत्वात् तन्न संशय:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
शत्रुसूदन श्रीकृष्ण! मेरी पुत्रवधू उत्तरा अभिमन्यु द्वारा कही गई एक बात को बार-बार दोहराती रहती है, क्योंकि वह उसे अत्यंत प्रिय है। उस बात की सत्यता में तनिक भी संदेह नहीं है॥ 22॥
 
Shatrusudana Sri Krishna! My daughter-in-law Uttara keeps repeating a thing said by Abhimanyu again and again because it is very dear to her. There is no doubt in the truth of that thing.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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