श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 66: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें आगमन और उत्तराके मृत बालककोजिलानेके लियेकुन्तीकी उनसे प्रार्थना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  14.66.15 
वासुदेव महाबाहो सुप्रजा देवकी त्वया।
त्वं नो गति: प्रतिष्ठा च त्वदायत्तमिदं कुलम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु वासुदेवनन्दन! आपको पाकर ही आपकी माता देवकी को अद्भुत पुत्र की प्राप्ति हुई है। आप ही हमारे एकमात्र आधार हैं और आप ही हमारा आधार हैं। इस कुल की रक्षा आपके ही हाथों में है॥ 15॥
 
‘Mahabahu Vasudevanandan! Only after getting you, your mother Devaki is considered to have a wonderful son. You are our only support and you are our foundation. The protection of this clan is in your hands.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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