श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 65: ब्राह्मणोंकी आज्ञासे भगवान‍् शिव और उनके पार्षद आदिकी पूजा करके युधिष्ठिरका उस धनराशिको खुदवाकर अपने साथ ले जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  14.65.2 
श्रुत्वा तु वचनं तेषां ब्राह्मणानां युधिष्ठिर:।
गिरीशस्य यथान्यायमुपहारमुपाहरत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उन ब्राह्मणों के वचन सुनकर राजा युधिष्ठिर ने भगवान शंकर को विधिपूर्वक नैवेद्य अर्पित किया॥2॥
 
Hearing the words of those Brahmins, King Yudhishthir formally offered Naivedya to Lord Shankar. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)