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mahabharat 14.64.6-7h: महाराज! अनेक सरोवरों, नदियों, वनों, उपवनों और पर्वतों को पार करते हुए महाराज युधिष्ठिर उस स्थान पर पहुँचे जहाँ राजा मरुत्त का उत्तम धन रखा हुआ था।   |   mahabharat अध्याय 14.64: पाण्डवोंका हिमालयपर पहुँचकर वहाँ पड़ाव डालना और रातमें उपवासपूर्वक निवास करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.64.6-7h 
सरांसि सरितश्चैव वनान्युपवनानि च।
अत्यक्रामन्महाराजो गिरिं चाप्यन्वपद्यत॥ ६॥
तस्मिन् देशे च राजेन्द्र यत्र तद् द्रव्यमुत्तमम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! अनेक सरोवरों, नदियों, वनों, उपवनों और पर्वतों को पार करते हुए महाराज युधिष्ठिर उस स्थान पर पहुँचे जहाँ राजा मरुत्त का उत्तम धन रखा हुआ था।
 
King! Crossing numerous lakes, rivers, forests, groves and mountains, Maharaja Yudhishthira reached the place where the excellent wealth (kept by King Marutta) was stored. 6 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)