श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरका अपने भाइयोंके साथ परामर्श करके सबको साथ ले धन ले आनेके लिये प्रस्थान करना  »  श्लोक 24-d9h
 
 
श्लोक  14.63.24-d9h 
मूले निक्षिप्य कौरव्यं युयुत्सुं धृतराष्ट्रजम्।
सम्पूज्यमाना: पौरैश्च ब्राह्मणैश्च मनीषिभि:॥ २४॥
(प्रययु: पाण्डवा वीरा नियमस्था: शुचिव्रता:।)
 
 
अनुवाद
कुरुवंशी धृतराष्ट्र के पुत्र युयुत्सुको अपने कुल के संस्थापक धृतराष्ट्र, गांधारी और कुन्ती के पास अपनी रक्षा के लिए नियुक्त करके वीर पाण्डव वहाँ से चले और बुद्धिमान ब्राह्मणों तथा ग्रामवासियों द्वारा पूजित होकर उन्होंने उत्तम व्रत का पालन किया और शौच, संतोष आदि नियमों में दृढ़तापूर्वक स्थित हो गए ॥24॥
 
Appointing Kuru dynasty Dhritarashtra's son Yuyutsuko for their protection near the founders of their clan, Dhritarashtra, Gandhari and Kunti, the brave Pandavas departed from there and were worshiped by the wise Brahmins and the villagers. They followed the best fast of all and were firmly established in the rules of defecation, satisfaction etc. 24॥
 
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि द्रव्यानयनोपक्रमे त्रिषष्टितमोऽध्याय:॥ ६३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें द्रव्य लानेका उपक्रमविषयक तिरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६३॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ८ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ३२ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)