Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.61.9-10h: वृष्णिनन्दन! अभिमन्यु के नेत्र आपके समान ही सुन्दर थे। हाय! युद्धभूमि में शत्रुओं ने उसे कैसे मार डाला? ऐसा प्रतीत होता है कि समय पूरा होने से पहले मनुष्य का मरना अत्यन्त कठिन है, इसीलिए यह दुःखद समाचार सुनकर भी मेरा हृदय शोक से सैकड़ों टुकड़ों में नहीं टूट रहा है॥9 1/2॥ | mahabharat अध्याय 14.61: श्रीकृष्णका सुभद्राके कहनेसे वसुदेवजीको अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सदृशाक्षस्तव कथं शत्रुभिर्निहतो रणे।
दुर्मरं बत वार्ष्णेय कालेऽप्राप्ते नृभि: सह॥ ९॥
यत्र मे हृदयं दु:खाच्छतधा न विदीर्यते।
अनुवाद
वृष्णिनन्दन! अभिमन्यु के नेत्र आपके समान ही सुन्दर थे। हाय! युद्धभूमि में शत्रुओं ने उसे कैसे मार डाला? ऐसा प्रतीत होता है कि समय पूरा होने से पहले मनुष्य का मरना अत्यन्त कठिन है, इसीलिए यह दुःखद समाचार सुनकर भी मेरा हृदय शोक से सैकड़ों टुकड़ों में नहीं टूट रहा है॥9 1/2॥
Vrishninandan! Abhimanyu's eyes were as beautiful as yours. Alas! How was he killed by the enemies on the battlefield? It seems that it is very difficult for a man to die before his time is up, that is why even after hearing this tragic news my heart does not break into hundreds of pieces out of grief.॥ 9 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥