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mahabharat 14.61.20-21h: हे वृष्णिवंश के रत्न पिताश्री! फिर भी आपका पौत्र बहुत से शत्रुओं का संहार करके युद्ध में दु:शासन के पुत्र का विषय बन गया।   |   mahabharat अध्याय 14.61: श्रीकृष्णका सुभद्राके कहनेसे वसुदेवजीको अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.61.20-21h 
तत: शत्रुवधं कृत्वा सुमहान्तं रणे पित:॥ २०॥
दौहित्रस्तव वार्ष्णेय दौ:शासनिवशं गत:।
 
 
अनुवाद
हे वृष्णिवंश के रत्न पिताश्री! फिर भी आपका पौत्र बहुत से शत्रुओं का संहार करके युद्ध में दु:शासन के पुत्र का विषय बन गया।
 
Father, the jewel of the Vrishni clan! Even then, after killing a large number of enemies, your grandson became the subject of Dushasan's son in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)