Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.61.18-19h: "प्रभु! यदि उसे प्रत्येक योद्धा से निरन्तर युद्ध करना पड़ता, तो वज्रधारी इन्द्र भी उसे युद्धभूमि में नहीं मार पाते (किन्तु वहाँ तो स्थिति ही दूसरी थी)।॥18 1/2॥ | mahabharat अध्याय 14.61: श्रीकृष्णका सुभद्राके कहनेसे वसुदेवजीको अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एको ह्येकेन सततं युध्यमाने यदि प्रभो॥ १८॥
न स शक्येत संग्रामे निहन्तुमपि वज्रिणा।
अनुवाद
"प्रभु! यदि उसे प्रत्येक योद्धा से निरन्तर युद्ध करना पड़ता, तो वज्रधारी इन्द्र भी उसे युद्धभूमि में नहीं मार पाते (किन्तु वहाँ तो स्थिति ही दूसरी थी)।॥18 1/2॥
"Prabhu! If he had to fight with each warrior continuously, then even Indra wielding the thunderbolt would not have been able to kill him on the battlefield (but there the situation was different).॥ 18 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥