श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 6: नारदजीकी आज्ञासे मरुत्तका उनकी बतायी हुई युक्तिके अनुसार संवर्तसे भेंट करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  14.6.8 
बृहस्पतिरुवाच
अमर्त्यं याजयित्वाहं याजयिष्ये कथं नरम्।
मरुत्त गच्छ वा मा वा निवृत्तोऽस्म्यद्य याजनात् ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
बृहस्पतिजी बोले - मरुत! अमर यज्ञ करने के बाद मैं मर्त्यों का यज्ञ कैसे करूँगा? तुम जाओ या रहो। अब मैं मनुष्यों के यज्ञ करने से निवृत्त हो गया हूँ।
 
Brihaspatiji said - Marut! After performing the sacrifices of immortals how will I perform the sacrifices of mortals? You may go or stay. Now I have retired from performing the sacrifices of humans.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)