तब ऋषि संवर्त लौटकर थककर एक वट वृक्ष के नीचे बैठ गए, जिसकी छाया शीतल थी और जो अनेक शाखाओं से सुशोभित था।
Then the sage Samvarta returned and sat down exhausted under a banyan tree that had a cool shade and was adorned with many branches.
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अश्वमेधपर्वणि संवर्तमरुत्तीये षष्ठोऽध्याय:॥ ६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अश्वमेधपर्वमें संवर्त और मरुत्तका उपाख्यानविषयक छठा अध्याय पूरा हुआ॥ ६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥