श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 6: नारदजीकी आज्ञासे मरुत्तका उनकी बतायी हुई युक्तिके अनुसार संवर्तसे भेंट करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  14.6.27 
व्यास उवाच
स तथेति प्रतिश्रुत्य पूजयित्वा च नारदम्।
अभ्यनुज्ञाय राजर्षिर्ययौ वाराणसीं पुरीम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी कहते हैं - हे राजन्! यह सुनकर राजर्षि मरुत्त ने 'बहुत अच्छा' कहकर नारदजी की बहुत प्रशंसा की और उनकी अनुमति लेकर वाराणसी की ओर प्रस्थान किया।
 
Vyasa says - O King! On hearing this, Rajarshi Marutta said 'very good' and praised Narada profusely and after taking his permission, he proceeded towards Varanasi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)