नारद उवाच
उन्मत्तवेषं बिभ्रत् स चङ्क्रमीति यथासुखम्।
वाराणस्यां महाराज दर्शनेप्सुर्महेश्वरम्॥ २२॥
अनुवाद
नारद बोले, 'महाराज! इस समय वह महेश्वर विश्वनाथ के दर्शन की इच्छा से पागल का वेश धारण करके वाराणसी में घूम रहा है।
Narada said, 'Maharaj! At this moment he is roaming around in Varanasi disguised as a mad person with the desire to have the darshan of Maheshwar Vishwanath.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥