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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 6: नारदजीकी आज्ञासे मरुत्तका उनकी बतायी हुई युक्तिके अनुसार संवर्तसे भेंट करना
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श्लोक 17
श्लोक
14.6.17
व्यास उवाच
एवमुक्तस्तु राज्ञा स नारद: प्रत्युवाच ह।
आविक्षितं महाराज वाचा संजीवयन्निव॥ १७॥
अनुवाद
व्यासजी कहते हैं - महाराज! राजा मरुत के ऐसा कहने पर नारद मुनि ने अपने अमृतमय वचनों से अविक्षित कुमार को जीवनदान दिया।
Vyasa says - Maharaj! When King Marut said this, sage Narada gave life to Avikshit Kumar with his nectar-like words.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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