श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 59: भगवान‍् श्रीकृष्णका द्वारकामें जाकर रैवतक पर्वतपर महोत्सवमें सम्मिलित होना और सबसे मिलना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  14.59.14-15h 
पुण्यावसथवान् वीर पुण्यकृद्भिर्निषेवित:।
विहारो वृष्णिवीराणां महे रैवतकस्य ह॥ १४॥
स नगो वेश्मसंकीर्णो देवलोक इवाबभौ।
 
 
अनुवाद
हे वीर योद्धा! उस पर्वत पर पुण्यकर्म हेतु अनेक गृह और आश्रम बने हुए थे, जहाँ पुण्यात्मा पुरुष निवास करते थे। उस पर्व में रैवतक पर्वत को वृष्णिवंशी योद्धाओं के विश्राम का स्थान बनाया गया था। वह पर्वतीय क्षेत्र अनेक गृहों से सुशोभित था और देवलोक के समान प्रतीत होता था।
 
O brave warrior! On that mountain, many houses and hermitages were built for performing holy rituals, where pious men resided. In that festival, the Raivataka mountain was made the place of rest for the warriors of the Vrishni clan. That mountainous region was adorned with many houses and looked like Devlok. 14 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)