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mahabharat 14.58.9: अच्छा, अब तुम्हारी इच्छा के अनुसार मैंने तुम्हें ये बहुमूल्य रत्नजड़ित कुण्डल दे दिए हैं। अब जो वचन दिया था, उसे पूरा करो॥9॥   |   mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  14.58.9 
तदिष्टे ते मया दत्ते एते स्वे मणिकुण्डले।
य: कृतस्तेऽद्य समय: सफलं तं कुरुष्व मे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अच्छा, अब तुम्हारी इच्छा के अनुसार मैंने तुम्हें ये बहुमूल्य रत्नजड़ित कुण्डल दे दिए हैं। अब जो वचन दिया था, उसे पूरा करो॥9॥
 
Well, now as per your wish, I have given you these precious gemstone earrings. Now fulfill the promise you have made.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)