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mahabharat 14.58.54: उस समय उन परम तेजस्वी महर्षि का निश्चय सुनकर सबके नेत्र भय से फैल गए और सबने विधिपूर्वक उनकी पूजा की ॥54॥   |   mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  14.58.54 
श्रुत्वा च निश्चयं तस्य महर्षेरतितेजस:।
सम्भ्रान्तनयना: सर्वे पूजां चक्रुर्यथाविधि॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
उस समय उन परम तेजस्वी महर्षि का निश्चय सुनकर सबके नेत्र भय से फैल गए और सबने विधिपूर्वक उनकी पूजा की ॥54॥
 
At that time, on hearing the determination of that extremely illustrious Maharshi, everyone's eyes became wide with fear and everybody worshipped him in a proper manner. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)