Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.58.53: धुएँ के कारण सर्पों की आँखें लाल हो गई थीं। वे अग्नि की गर्मी से जल रहे थे। महात्मा भार्गव (उत्तंक) का क्या निर्णय है, यह जानने के लिए सभी लोग एकत्रित होकर उनके पास आए। 53. | mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते धूमरक्तनयना वह्नितेजोऽभितापिता:।
आजग्मुर्निश्चयं ज्ञातुं भार्गवस्य महात्मन:॥ ५३॥
अनुवाद
धुएँ के कारण सर्पों की आँखें लाल हो गई थीं। वे अग्नि की गर्मी से जल रहे थे। महात्मा भार्गव (उत्तंक) का क्या निर्णय है, यह जानने के लिए सभी लोग एकत्रित होकर उनके पास आए। 53.
The eyes of the serpents had become red due to the smoke. They were burning in the heat of the fire. To know what the decision of Mahatma Bhaargava (Uttank) was, everyone gathered and came to him. 53.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥