Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.58.51-52: जनमेजय! ऐरावत के सम्पूर्ण घर में कोलाहल मच गया। भरत! वासुकि आदि नागों के घर धुएँ से ढक गए। उनमें अन्धकार छा गया। वे ऐसे प्रतीत हो रहे थे मानो वे कोहरे से आच्छादित वन और पर्वत हों। 51-52। | mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हाहाकृतमभूत् सर्वमैरावतनिवेशनम्।
वासुकिप्रमुखानां च नागानां जनमेजय॥ ५१॥
न प्राकाशन्त वेश्मानि धूमरुद्धानि भारत।
नीहारसंवृतानीव वनानि गिरयस्तथा॥ ५२॥
अनुवाद
जनमेजय! ऐरावत के सम्पूर्ण घर में कोलाहल मच गया। भरत! वासुकि आदि नागों के घर धुएँ से ढक गए। उनमें अन्धकार छा गया। वे ऐसे प्रतीत हो रहे थे मानो वे कोहरे से आच्छादित वन और पर्वत हों। 51-52।
Janamejaya! There was uproar in the entire house of Airavat. Bhaarat! The houses of the serpents like Vasuki etc. were covered with smoke. Darkness spread in them. They looked as if they were forests and mountains covered with fog. 51-52.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥