Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.58.36: हे जनमेजय! उस वज्र के प्रहार से पृथ्वी फट गई और नागलोक का मार्ग प्रकट हो गया।   |   mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  14.58.36 
ततो वज्रप्रहारैस्तैर्दार्यमाणा वसुन्धरा।
नागलोकस्य पन्थानमकरोज्जनमेजय॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे जनमेजय! उस वज्र के प्रहार से पृथ्वी फट गई और नागलोक का मार्ग प्रकट हो गया।
 
O Janamejaya! The earth was torn apart by the blow of that thunderbolt and revealed the path to Nagaloka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)