Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.58.35: वैशम्पायन कहते हैं: हे राजन! जब वज्रधारी इन्द्र किसी भी प्रकार उत्तंक को उसके निश्चय से विचलित न कर सके, तब उन्होंने अपने वज्रस्त्र से उसकी छड़ी के अग्रभाग पर प्रहार किया। | mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं: हे राजन! जब वज्रधारी इन्द्र किसी भी प्रकार उत्तंक को उसके निश्चय से विचलित न कर सके, तब उन्होंने अपने वज्रस्त्र से उसकी छड़ी के अग्रभाग पर प्रहार किया।
Vaishmpayana says: O King! When Indra, the bearer of the thunderbolt, could not in any way dissuade Uttanka from his resolve, he then struck the tip of his stick with his Vajraastra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥