Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.58.30-31: उत्तंक नागलोक जाने का मार्ग बनाने का संकल्प करके पृथ्वी खोद रहे थे, तभी वज्रधारी महाबली इन्द्र घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले रथ पर बैठकर उस स्थान पर पहुंचे और महाबली ब्राह्मण उत्तंक से उनकी भेंट हुई। | mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उत्तंक नागलोक जाने का मार्ग बनाने का संकल्प करके पृथ्वी खोद रहे थे, तभी वज्रधारी महाबली इन्द्र घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले रथ पर बैठकर उस स्थान पर पहुंचे और महाबली ब्राह्मण उत्तंक से उनकी भेंट हुई।
Uttanka, having resolved to make a path to go to Nagaloka, was digging the earth when the mighty Indra, wielding the thunderbolt, arrived at that place seated on a chariot drawn by horses and met the great Brahmin Uttanka.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥