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mahabharat 14.58.23-24h: लताओं के प्रहार से बंधन टूट गया और कुंडलियों सहित मृगचर्म सहसा वृक्ष से नीचे गिर पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  14.58.23-24h 
बिल्वप्रहारैस्तस्याथ व्यशीर्यद् बन्धनं तत:॥ २३॥
सकुण्डलं तदजिनं पपात सहसा तरो:।
 
 
अनुवाद
लताओं के प्रहार से बंधन टूट गया और कुंडलियों सहित मृगचर्म सहसा वृक्ष से नीचे गिर पड़ा।
 
The bond broke due to the blow of the vines and the deerskin along with the coils suddenly fell down from the tree. 23 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)