वैशम्पायन उवाच
इत्युक्त: स तदा राज्ञा क्षमं बुद्धिमता हितम्।
अनुज्ञाप्य स राजानमहल्यां प्रतिजग्मिवान्॥ १७॥
अनुवाद
वैशम्पायन जी कहते हैं - 'हे जनमेजय! बुद्धिमान राजा सौदास के मुख से ऐसी उचित एवं हितकारी बातें सुनकर, उनकी अनुमति लेकर मुनि उत्तंक अहिल्या की ओर चल पड़े।
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! Having heard such appropriate and beneficial words from the mouth of the wise king Saudasa, taking his permission the sage Uttank proceeded towards Ahalya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥