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mahabharat 14.57.7: राजेन्द्र! हे राजनश्रेष्ठ! मैंने अपने गुरु को जो वस्तु देने का वचन दिया है, वह आपके अधीन है; अतः हे राजन! मैं आपसे उसे माँगता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 14.57: उत्तंकका सौदाससे उनकी रानीके कुण्डल माँगना और सौदासके कहनेसे रानी मदयन्तीके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.57.7 
संश्रुतश्च मया योऽर्थो गुरवे राजसत्तम।
त्वदधीन: स राजेन्द्र तं त्वां भिक्षे नरेश्वर॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! हे राजनश्रेष्ठ! मैंने अपने गुरु को जो वस्तु देने का वचन दिया है, वह आपके अधीन है; अतः हे राजन! मैं आपसे उसे माँगता हूँ।
 
Rajendra! O best of kings! The thing that I have promised to give to my Guru is under your control; therefore, O lord of kings! I beg for it from you. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)