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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 57: उत्तंकका सौदाससे उनकी रानीके कुण्डल माँगना और सौदासके कहनेसे रानी मदयन्तीके पास जाना
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श्लोक 27
श्लोक
14.57.27
ह्रस्वेन चैते आमुक्ते भवतो ह्रस्वके तदा।
अनुरूपेण चामुक्ते जायेते तत्प्रमाणके॥ २७॥
अनुवाद
जब कोई छोटा व्यक्ति इन बालियों को पहनता है, तो वे छोटी हो जाती हैं और जब कोई लंबा व्यक्ति उन्हें पहनता है, तो वे तदनुसार बड़ी हो जाती हैं ॥ 27॥
‘When a short person wears these earrings, they become smaller and when a tall person wears them, they become bigger accordingly.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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