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mahabharat 14.57.18: सौदास ने कहा, "ब्राह्मण! आज तुम उसे वन में एक झरने के पास देखोगे। अभी दिन का छठा भाग है (मैं भोजन की तलाश में हूँ), अतः इस समय मैं उससे नहीं मिल सकता।"   |   mahabharat अध्याय 14.57: उत्तंकका सौदाससे उनकी रानीके कुण्डल माँगना और सौदासके कहनेसे रानी मदयन्तीके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.57.18 
सौदास उवाच
तां द्रक्ष्यति भवानद्य कस्मिंश्चिद् वननिर्झरे।
षष्ठे काले न हि मया सा शक्या द्रष्टुमद्य वै॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सौदास ने कहा, "ब्राह्मण! आज तुम उसे वन में एक झरने के पास देखोगे। अभी दिन का छठा भाग है (मैं भोजन की तलाश में हूँ), अतः इस समय मैं उससे नहीं मिल सकता।"
 
Saudasa said, "Brahmin! You will see him today near a waterfall in the forest. This is the sixth part of the day (I am in search of food), so I cannot meet him at this time." 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)